आज हिंदुस्तान में भूखमरी, बेरोजगारी, अपराध जैसे मूलभूत मुद्दों को दरकिनार करके उसकी जगह साम्प्रदायिकता ने ले ली है।

सरकार से लेकर लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ मीडिया ‘हिन्दू-मुस्लिम’ का राग अलापकर लोगों को बांटने में लगे हैं। हिन्दू-मुस्लिम करके लोगों में दूरियां पैदा करके इसी को न्यू इंडिया नाम से बेचा जा रहा है।

इन तमाम मुद्दों पर पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने चिंता जाहिर करते हुए मोदी सरकार और भाजपा को घेरा है। गौतम गंभीर ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए मोदी सरकार के हर उस काम को लपेटे में लिया है जिसका वो वादा करके सत्ता में आए थे।

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गंभीर ने लिखा कि, आज तड़के एक किसान के घर से खुदकुशी को निकलते देखा। मैं संभला ही था की साम्प्रदायिकता ने के जोर का धक्का मारा। मैं उठा तो पाया की भूख, अपराध, डेंगू, बेरोजगारी मुझे घेरे खड़े हैं। मैं बोला ‘तुम सब कब आए?’ वो बोले ‘जब तुम मंदिर-मस्जिद कर रहे थे।’

देश में ऐसी कम ही हस्तियाँ हैं जो सरकार के कामकाज की आलोचना करती हैं। यह यूँ कहें कि गलत को गलत और सही को सही बोलने की हिम्मत रखती हैं।

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ज्यादातर हस्तियाँ सरकार की तारीफों के पूल बांधती दिखाई देती हैं क्योंकि मन में होता है कहीं से कोई पुरस्कार मिल जाये या काम मिल जाये!

क्रिकेटर गौतम गंभीर उन चंद हस्तियों में से एक हैं जो आज अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। गौरतलब है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रिकॉर्ड हजारों किसानों ने आत्महत्या की है, नोटबंदी के बाद लाखों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है, झारखण्ड में संतोषी नाम की बच्ची भूख की वजह से दम तोड़ देती है।

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मगर फिर भी मोदी सरकार में हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद की राजनीती हो रही है। और मीडिया मोदी सरकार की नाकामियों को छुपाकर देश की जनता से गद्दारी कर रहा है।