भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाने में महिलाओं का बड़ा योगदान है। उत्पीड़न का शिकार हो रही देशभर की महिलाओं ने बीजेपी को सत्ता की कमान इस भरोसे पर सौंपी कि वह उन्हें उत्पीड़न से निजात दिलाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बीजेपी के सत्ता पर काबिज़ होते ही महिलाओं के साथ अत्पीड़न के मामले बढ़ गए।

मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों की फेहरिस्त में आ गया। मोदीराज में महिलाओं के साथ रे प और हिंसा की घटनाओं में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ। हद तो तब हो गई जब महिलाओं के साथ दु ष्कर्म के मामलों में ख़ुद बीजेपी के ही नेताओं का नाम आना शुरु हो गया।

कभी हरियाणा बीजेपी चीफ़ सुभाष बराला के बेटे विकास बराला का नाम एक युवती के अपहरण करने की कोशिश में आया तो कभी बीजेपी के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को एक युवती से बालात्कार करने के मामले में गिरफ्तार किया गया।

सबसे ताज़ा मामला तो बीजेपी के वरिष्ठ नेता स्वामी चिन्मयानंद का है। जिन्हें बीते कल ही एक छात्रा से बालात्कार के आरोप में गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए जेल भेजा गया। हालांकि ये बात भी किसी से छुपी नहीं है कि बीजेपी के इन दोनों नेताओं को जेल तक पहुंचाने के लिए पीड़िताओं को कितना संघर्ष करना पड़ा।

महिलाओं ने बीजेपी को ये सोचकर वोट किया था कि ये पार्टी उनका बचाव करेगी, लेकिन सत्ता में आने के बाद पार्टी ने रेप के आरोपी अपने नेताओं का ही बचाव करना शुरु कर दिया।

बालात्कार के आरोपी सेंगर और चिन्मयानंद का सरकार ने किस कदर बचाव किया, ये पूरे देश ने देखा। महिलाओं की इज़्ज़त से खेलने के आरोपी इन दोनों नेताओं को सरकार का संरक्षण किस हद तक प्राप्त है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को दख़ल देना पड़ा।

मोदी सरकार ने महिलाओं में विश्वास बढ़ाने के लिए साल 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि वो बेटियों के जीवन की भीख मांगने के लिए एक भिक्षुक के रूप में आए हैं। लेकिन बीजेपी के इन नेताओं के कुकर्मों को देखने के बाद ये कहा जा सकता है कि मोदी राज में बेटियां बचाई नहीं, बल्कि तड़पाई जा रही हैं।

By: Asif Raza