अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मध्यस्थता पैनल द्वारा समाधान नहीं निकलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में 6 अगस्त से नियमित सुनवाई शुरू हो गई है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। बताया जा रहा है कि इस मामले पर 17 नवंबर 2019 तक फ़ैसला आ जाएगा।

मामले पर सुप्रीम कोर्ट की तेज़ी का क्रेडिट भी अब केंद्र की मोदी सरकार को दिया जाने लगा है। टीवी चैनलों से ये बताने की कोशिश की जा रही है कि मोदी सरकार अपने सभी वादों को तेज़ी से पूरा कर रही है। ‘आजतक’ के शो ‘दंगल’ के आज के टाइटल को देखकर ही पूरे नैरेटिव को साफ़तौर पर समझा जा सकता है। शो का टाइटल रखा गया ‘अबकी बार राम मंदिर भी तैयार?’ यानी जिस तरह सरकार ने कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाया है, उसी तरह से सरकार राम मंदिर को भी बनवाने में कामयाब हो जाएगी।

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शो के एंकर रोहित सरदाना ने शो के पोस्टर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “ट्रिपल तलाक- वादा पूरा, अनुच्छेद 370- वादा पूरा, अब राम मंदिर भी नहीं रहेगा अधूरा?” रोहित सरदाना के मुताबिक, सरकार ने जनता से किए अपने सभी वादे पूरे कर दिए हैं। सरकार ने ट्रिपल तलाक से मुस्लिम महिलाओं को निजात दिलाने का वादा किया था, जेसे उसने पूरा कर दिया।

इसी तरह सरकार ने कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने का वादा किया था, जिसे पूरा कर दिया गया है और अब बारी राम मंदिर निर्माण की है। हालांकि सरकार पहले ही ये साफ़ कर चुकी है कि राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के आदेश से होगा, वो इसमें दखलंदाज़ी नहीं करेगी। इसके बावजूद गोदी मीडिया के पत्रकार इस मामले को भी सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने में जुटे हैं।

हैरानी की बात तो ये है कि गोदी मीडिया ने उपलब्धि के पैमाने को ही पूरी तरह से बदल दिया है। गोदी मीडिया की नज़र में जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को संबोधित करना, रोज़गार सृजन और अर्थव्यवस्था की बेहतरी उपलब्धि नहीं बल्कि राम मंदिर का निर्माण सरकार की उपलब्धि है।

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अगर गोदी मीडिया इन फैक्टर्स के आधार पर सरकार की उपलब्धि को मापती तो वह सरकार के उस वादे का ज़िक्र करती, जिसमें नौजवानों को हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के लिए कहा गया था। मीडिया सरकार से पूछती 100 स्मार्ट सिटीज़ बनाने के वादे का क्या हुआ? शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा से जुड़े वादों को अबतक पूरा क्यों नहीं किया गया? क्यों मोदीराज में महिलाओं के साथ रेप की घटनाओं पर लगाम नहीं कसी?

सरकार से ये सवाल भी नहीं किए जाते कि आपके ‘सबका साथ-सबका विकास’ वाले वादे का क्या हुआ? क्यों आपके राज में अल्पसंख्यक डरे हुए हैं? क्यों आए दिन कभी ‘राम’ के नाम पर तो कभी ‘गाय’ के नाम पर भीड़ अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है? सवाल तो अर्थव्यवस्था को लेकर भी किए जा सकते हैं। पूछा जा सकता है कि आपके दावों के उलट अर्थव्यवस्था पिछड़ क्यों रही है? कैसे भारत की अर्थव्यवस्था पांचवें स्थान से फिसल कर सातवें पर पहुंच गई?

लेकिन गोदी मीडिया जनसरोकार से जुड़े इन तमाम मुद्दों पर सरकार से सवाल नहीं करता। सवाल मंदिर निर्माण, धारा 370 और ट्रिपल तलाक़ को लेकर किए जाते हैं और इसपर चर्चा करके ये साबित करने की कोशिश की जाती है कि सरकार ने अपने तमाम वादे पूरे कर दिए। जबकि ये हक़ीक़त नहीं है।

By: Asif Raza