देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के क्षेत्र में पैसा लगाने वाली कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लिजिंग एंड फाइनेंशयल सर्विसेस (IL&FS) के डूबने के बाद अब देश की बाकी गैर बैंकिंग सेक्टर की कंपनियां भी खतरा मंडराने लगा है।

इस समय देश की कई गैर बैंकिंग कंपनियां दिवालिया होने की ओर बढ़ रहीं हैं। यह स्थिति IL&FS के डिफॉल्ट करने के बाद फंड ना जुटा पाने के कारण बनी है। इस स्थिति को देख कर लगता है कि यदि हालात इसी तरह रहे तो महज 6 सप्ताह के अंदर कई कंपनियां दिवालिया हो जाएंगी।

यहां पूरा मामला इस समय बाजार में चल रहीं मदी और निवेशकों द्वारा पैसे ना लागने के कारण हुआ है। दरअसल IL&FS के डिफॉल्ट होने के बाद बाजार में लिक्विडिटी क्रंच की स्थिति पैदा हो गई है।

इस स्थिति में कंपनियों के पास ना तो अपना कर्ज चुकाने का पैसा है ना ही निवेशकों द्वारा कोई निवेश कंपनियों में किया जा रहा है जिससे वह अपनी अपना कर्ज चुका पाएं।

4 साल में ONGC और LIC को बर्बाद कर दिया, देश को मूर्ख बनाने का यह धंधा कबतक चलेगा : रवीश

ऐसे में करीब 2 लाख करोड़ का कर्ज ना चुकाने की स्थिति में इन कंपनियों को जल्द ही दिवालिया घोषित किया जा सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक मामलों के विभाग ने कंपनी मामलों के मंत्रालय को पत्र लिखा कहा है कि यदि 6 हफ्तों में पर्याप्त फंड की व्यवस्था नहीं की गई तो कई गैर बैंकिंग कंपनियां दिवालियां हो जाएंगी। दिवालियां होने वाली कंपनियों में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि पिछले दो सालों में RBI ने मोदी सरकार को दो बार आगाह किया था कि IL&FS में संकट आ सकता है लेकिन सरकार की उदासीनता ये है कि उसने इस दौरान कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की एक मीटिंग भी नहीं करवाई।

दुनिया में सरकारी कंपनी डूबती है तो हंगामा मच जाता है लेकिन भारत में ऐसी खबरों को दबाकर रखा जा रहा है : रवीश कुमार

लेकिन इसमें देखने वाली बात ये है कि देश की गैर बैंककिंग कंपनियां एक ऐसे वक्त में दिवालियां होने की कगार पर है जब भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

आर्थिक मामलों के जानकार इसे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने और अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिकूल स्थिति मानते हैं।