लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के नाम पर खुलकर वोट मांगा था। उन्होंने उस वक्त दावा किया था कि उनकी सरकार सेना की सबसे बड़ी हितैशी है। लेकिन अब आईटीआई से हुए एक ख़ुलासे ने उनके इस दावे की पोल खोल दी है।

दरअसल, गृह मंत्रालय से मिले आरटीआई के एक जवाब से इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों में से सिर्फ 12 के परिवारों को ही नौकरी की पेशकश की गई है, वह भी सिर्फ राज्य सरकारों द्वारा। केंद्र सरकार की तरफ से संबंध में कोई पेशकश नहीं की गई है।

बता दें कि इसी साल फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए थे। इस हमले को केंद्र सरकार की मोदी सरकार ने अपनी चुनावी रैलियों में जमकर भुनाने की कोशिश की थी और वादा किया था कि सरकार पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों की हर संभव मदद करेगी।

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लेकिन अब आरटीआई से हुए ताज़ा ख़ुलासे से ये साबित हो गया है कि मोदी सरकार ने शहीदों और उनके परिवारों को न तो कोई पर्याप्त मुआवजा दिया, और न ही सभी 40 जवानों के परिजनों को नौकरी मिली। आरटीआई से हुए इस ख़ुलासे को हिंदी न्यूज़ पोर्टल ‘नवजीवन’ ने प्रकाशित किया है।

पोर्टल के मुताबिक, जिन 12 परिवारों को नौकरी की पेशकश हुई है, उनमें से 9 उत्तर प्रदेश की हैं, जबकि एक जवान का परिवार केरल में और एक का असम में रहता है। इसके अलावा पुलवामा हमले के 36 घंटे के भीतर ही ‘वीर भारत कोर’ फंड में करीब 7 करोड़ रुपए जमा हो गए थे। वैसे इस फंड में अगस्त 2019 तक 258 करोड़ रुपए जमा थे।

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इस फंड का मकसद शहीद सैनिकों के परिवारों को आर्थिक मदद पहुंचाना है। लेकिन, आरटीआई जवाब के मुताबिक, इसमें से सिर्फ 5 करोड़ 68 लाख रुपए ही शहीदों को परिवारों में बांटे गए हैं। यानी एक परिवार औसतन करीब 15 लाख रुपए की मदद दी गई है।

इस ख़ुलासे के सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर ज़ोरदार हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सूरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, “शहादत की मार्केटिंग करके चुनाव तो जीत लिया लेकिन, शहीदों के परिवार को अधिकार के लिए अपमानित कर रहे हैं। पूरे हिंदुस्तान से तो भाजपाई जुमलेबाजी करते है, कम से कम सैनिकों को बख्श देते”।