बाबरी मस्जिद और राम मंदिर को लेकर इन दिनों देश की सियासत खामखाँ गरमाई हुई है। मगर सभी को इस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। 2014 से सत्ता पर काबिज मोदी सरकार और आरएसएस 2019 के लोकसभा चुनाव आते ही राम मंदिर बनाने की ‘अधज़ोर’ कोशिश करने लगे हैं।

हालांकि, देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले की सुनवाई जनवरी, 2019 तक टाल दी है। लेकिन एक बार फिर अयोध्या मुद्दा तो गरमा ही गया है।

इस बीच महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए उद्धव ने कहा कि, “अगर मोदी सरकार राम मंदिर नहीं बनवा पाती है तो आने वाले लोकसभा चुनाव में उसकी सरकार गिर जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा- “यह पहली बार है कि इस राजनीतिक विचारधारा (आरएसएस) की पूर्ण बहुमत की सरकार है जो चुनाव में मंदिर बनवाने का वादा करके सत्ता में आई थी। अगर फिर भी इस सरकार में मंदिर नहीं बन पाता है तो मोदी सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।”

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उद्धव ठाकरे 25 नवंबर को अयोध्या के दौरे पर जाने वाले हैं। वहां उद्धव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को याद दिलाएंगे कि राम मंदिर क्यों बनवाने की जरुरत है। उन्होंने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि बीजेपी ने शिवसेना द्वारा याद दिलाये जाने के बाद ये मुद्दा उठाया है।

बता दें कि शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक कदम जाते हुए पिछले दिनों बयान दिया कि, “अगर हम राम मंदिर पर कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे तो इसमें 1000 साल लग जायेंगे!” यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बीजेपी और शिवसेना एक ही थाली के दो पहलू हैं।

दोनों पार्टियों की राजनीती भी लगभग एक है। ये दोनों ही पार्टियाँ एक दूसरे को उकसाकर और आरोप-प्रत्यारोप लगाकर राम मंदिर के नाम पर वोट बटोरने की कोशिश में हैं। वोट लेने की लालच में बीजेपी और शिवसेना दोनों ही लोकतंत्र की सुरक्षा करने वाले के सबसे बड़े कोर्ट उच्च न्यायालय की भी अवहेलना करने से बाज़ नहीं आए।

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कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद अपनी-अपनी सुविधा अनुसार बयानबाजी आकर रही हैं। उधर मोदी सरकार सालाना दो करोड़ रोजगार न दे पाने, गंगा की सफाई, नक्सलवाद, महंगाई, पेट्रोल-डीजल जैसे तमाम मुद्दों पर विफल हो चुकी है।

राफेल विमान मसले पर पूरी तरह से घिर चुकी मोदी सरकार कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। इसीलिए राफेल के सवाल पर सरकार का कोई भी मंत्री बचता फिर रहा है। लेकिन फिर भी जनता को ये सभी मूलभूत चीज़े के जवाब नहीं चाहिए उन्हें ‘मंदिर’ चाहिए।