न्यूज 18 पर शाम 6.57 बजे एक डिबेट शो आता है। शो का नाम है ‘आर पार’। एंकर होते हैं अमिश देवगन। इन्हें प्यार से ‘हिंदी का अर्नब गोस्वामी’ भी कहा जाता है। अर्नब और अमीश में सिर्फ भाषा का फर्क है।

अर्नब जिस कुतर्क को अंग्रेजी में चिल्लाते हैं, अमीश उसी काम को हिंदी में करते हैं। अमीश पीएम मोदी के मित्र अंबानी के न्यूज चैनल ‘न्यूज 18 इंडिया’ में एंकर हैं। हिंदू-मुस्लिम टॉपिक पर डिबेट कर बीजेपी के लिए माहौल बनाना इनका मुख्य काम है!

लेकिन फिलहाल गुजरात से भगाए जा रहे उत्तर भारतीयों का मुद्दा चल रहा है इसिलए बीजेपी को डिफेंड कर नमक का फर्ज अदा कर रहे हैं!

दरअसल 28 सितंबर को साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर कस्बे के पास एक गांव में 14 माह की बच्ची से कथित तौर पर बलात्कार हुआ था। इस रेप का आरोप बिहार के रहने वाले रविंद्र साहू नाम के मजदूर पर लगा है। रविंद्र साहू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब गुजरात में सभी बिहारियों के खिलाफ भयावह हिंसा का माहौल बन गया है।

तो अमीश के शो में आज का टॉपिक था गुजरात में कांग्रेस की ‘बँटवारा पॉलिटिक्स’? गुजरात जलाकर जीतेंगे 2019?

अमीश का कहना है कि गुजरात में जो कुछ भी हो रहा है उसके लिए कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर जिम्मेदार हैं। क्योंकि उन्होंने एक माह पहले एक भाषण में कहा था कि बाहरी लोग अपराध करके करते हैं। इतना नही अल्पेश ने यह भी कहा था कि फाक्ट्रियों को स्थानिय मजदूरों को वरीयता देनी चाहिए।

इस भाषण के आधार पर अमीश देवगन कांग्रेस से सवाल कर रहे हैं। करना भी चाहिए। लेकिन गुजरात में तो बीजेपी की सरकार है। अगर अल्पेश की वजह से गुजरात में उत्तर भारतीयों के साथ हिंसा हो रही है तो अभी तक विजय रुपाणी ने उन्हें जेल में क्यों नहीं डाला?

अल्पेश के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अमीश ये सवाल गुजरात की बीजेपी सरकार से क्यों नहीं पूछ रहें? पश्चिम बंगाल में हिंसा होती है तो अमीश किससे सवाल पूछते हैं, सत्ताधारी टीएमसी से या बीजेपी से?

और एक बात…

अल्पेश ने अपने भाषण में फैक्ट्रियों को स्थानीय लोगों को वरियता देने की बात कही है। गुजरात की विजय रुपाणी सरकार ऐसा क़ानून लाने जा रही है जिसके कारण राज्य के उद्योगों को अस्सी फ़ीसदी काम गुजरातियों को दोनों होंगे।
इस अस्सी फ़ीसदी में से पचीस फ़ीसदी काम उस ज़िले के लोगों को देना होगा जहाँ उद्योग स्थापित होंगे।

अगर ये क़ानून बन गया तो वैसे भी यूपी बिहार के लोगों को गुजरात से बाहर जाना होगा। क्या क़ानून बनाकर वहाँ काम कर रहे मज़दूरों को भगाया जा रहा है? सवाल ये भी उठता है कि क्या विजय रुपाणी इस हिंसा की आर में अपने कानून के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं ?